Sunday, 18 December 2016

शिक्षा का लक्ष्यः क्या कहता है एनसीएफ-2005?


शिक्षा का लक्ष्यः क्या कहता है एनसीएफ-2005?


बच्चे, पढ़ना सीखना, बच्चे का शब्द भण्डार कैसे बनता हैभारत में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ) का निर्माण करने की जिम्मेदारी एनसीईआरटी की है। यह संस्था समय-समय पर इसकी समीक्षा भी करती है। एनसीएफ-2005 के बनने का कार्य एनसीईआरटी के तत्कालीन निदेशक प्रो. कृष्ण कुमार के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
इसमें शिक्षा को बाल केंद्रित बनाने, रटंत प्रणाली से निजात पाने, परीक्षा में सुधार करने और जेंडर, जाति, धर्म आदि आधारों पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करने की बात कही गई है। शोध आधारित दस्तावेज़ तैयार करने के लिए 21 राष्ट्रीय फोकस समूह बने जो विभिन्न विषयों पर केंद्रित थे। इसके नेतृत्व की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के विषय विशेषज्ञों को दी गई।

शिक्षा के लक्ष्य

1.एनसीएफ-2005 के अनुसार शिक्षा का लक्ष्य किसी बच्चे के स्कूली जीवन को उसके घर, आस-पड़ोस के जीवन से जोड़ना है। इसके लिए बच्चों को स्कूल में अपने वाह्य अनुभवों के बारे में बात करने का मौका देना चाहिए। उसे सुना जाना चाहिए। ताकि बच्चे को लगे कि शिक्षक उसकी बात को तवज्जो दे रहे हैं।
2. शिक्षा का दूसरा प्रमुख लक्ष्य है आत्म-ज्ञान (Self-Knowledge)। यानि शिक्षा खुद को खोजने, खुद की सच्चाई को जानने की एक निरंतर प्रक्रिया बने। इसके लिए बच्चों को विभिन्न तरह के अनुभवों का अवसर देकर इस प्रक्रिया को सुगम बनाने की बात एनसीएफ में कही गई है।
3. शिक्षा के तीसरे लक्ष्य के रूप में साध्य और साधन दोनों के सही होने वाले मुद्दे पर चर्चा की गई है। इसमें कहा गया कि मूल्य शिक्षा अलग से न होकर पूरी शिक्षा की पूरी प्रक्रिया में शामिल होनी चाहिए। तभी हम बच्चों के सामने सही उदाहरण पेश कर पाएंगे।
4. सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करने और जीवन जीने के अन्य तरीकों के प्रति भी सम्मान का भाव विकसित करने की बात करता है।
5. वैयक्तिक अंतर के महत्व को स्वीकार करने की बात करता है। इसमें कहा गया है कि हर बच्चे की अपनी क्षमताएं और कौशल होते हैं। इसे स्कूल में व्यक्त करने का मौका देना चाहिए जैसे संगीत, कला, नाट्य, चित्रकला, साहित्य (किस्से कहानियां कहना), नृत्य एवं प्रकृति के प्रति अनुराग इत्यादि।
6. ज्ञान के वस्तुनिष्ठ तरीके के साथ-साथ साहित्यिक एवं कलात्मक रचनात्मकता को भी मनुष्य के ज्ञानात्मक उपक्रम का एक हिस्सा माना गया है। यहां पर तर्क (वैज्ञानिक अन्वेषण) के साथ-साथ भावना (साहित्य) वाले पहलू को भी महत्व देने की बात कही गई है।
7. इसमें कहा गया है, “शिक्षा को मुक्त करने वाली प्रक्रिया (Liberating process) के रूप में देखा जाना चाहिए अन्यथा अबतक जो कुछ भी कहा गया है वह अर्थहीन हो जाएगा। शिक्षा की प्रक्रिया को सभी तरह के शोषण और अन्याय  गरीबी, लिंग भेद, जाति तथा सांप्रदायिक झुकाव) से मुक्त होना पड़ेगा जो हमारे बच्चों को इस प्रक्रिया से वंचित करते हैं।
8. आठवीं बिंदु स्कूल में पढ़ने-पढ़ाने के काम के लिए अच्छा माहौल बनाने की बात करता है। साथ ही ऐसा माहौल बनाने में बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करने की भी बात करता है। यानि शिक्षक खुद आगे न आकर बच्चों को नेतृत्व करने का मौका दें।
9. नौवां बिंदु अपने देश के ऊपर गर्व की भावना विकसित करने की बात करता है। ताकि बच्चे देश से हरा जुड़ाव महसूस कर सकें। इसके साथ ही कहा गया है, “बच्चों में अपने राष्ट्र के प्रति गौरव की भावना संपूर्ण मानवता की महान उपलब्धियों के प्रति गौरव को पीछे न कर दे।”
Source:https://educationmirror.org/2016/09/10/equality-in-edauction-ncf-2005/

No comments:

Post a Comment

Featured post

"Reading Day and Reading Month Celebration 2026-27"

  "Reading Day and Reading Month Celebration 2026-27" Event Timing: June 19thJune to 18th July, 2026-27 KVSC LIBRARY Celebrating ...